विवाह के केंद्र पर खड़ा कर दिया है, प्रेम के केंद्र पर नहीं

हमने सारे परिवार को विवाह के केंद्र पर खड़ा कर दिया है, प्रेम के केंद्र पर नहीं। हमने यह मान रखा है कि विवाह कर देने से दो व्‍यक्‍ति प्रेम की दुनिया में उतर जाएंगे। अद्भुत झूठी बात है, और पांच हजार वर्षों में भी हमको इसका ख्‍याल नहीं आ सका है। हम अद्भुत अंधे हैं। दो आदमियों के हाथ बांध देने से प्रेम के पैदा हो जाने की कोई जरूरत नहीं है। कोई अनिवार्यता नहीं है बल्‍कि सच्‍चाई यह है कि जो लोग बंधा हुआ अनुभव करते हैं, वे आपस में प्रेम कभी नहीं कर सकते।
Source - Dhiraj Bharti - Facebook

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